हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 की तैयारी तेज, 18 दिन बंद रहेगी गंगनहर; हर की पौड़ी पर घटा जलप्रवाह admin, October 22, 2026October 22, 2026 उपशीर्षक: वार्षिक सफाई और मरम्मत के साथ घाटों के निर्माण कार्यों के लिए ऊपरी गंगनहर बंद की गई है। 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद जलप्रवाह दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। हरिद्वार, उत्तराखंड: वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच हरिद्वार में गंगा घाटों और जलप्रवाह से जुड़ा महत्वपूर्ण काम किया जा रहा है। ऊपरी गंगनहर को वार्षिक सफाई, मरम्मत और रखरखाव के लिए लगभग 18 दिनों तक बंद किया गया है। इस दौरान हर की पौड़ी सहित आसपास के घाटों पर जलप्रवाह प्रभावित हुआ है। गंगनहर बंद होने से हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नहर में 7 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि के आसपास पानी दोबारा छोड़े जाने की योजना है। इसके बाद 8 नवंबर की सुबह तक हर की पौड़ी और अन्य संबंधित घाटों पर जलप्रवाह सामान्य होने की उम्मीद है। क्यों बंद की गई ऊपरी गंगनहर? ऊपरी गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर की सफाई, गाद हटाने, मरम्मत, पुनर्स्थापन और संरचनाओं को मजबूत करने जैसे कार्य किए जाते हैं। इस वर्ष इन नियमित कार्यों के साथ वर्ष 2027 के अर्धकुंभ मेले की तैयारियों को भी गति दी जा रही है। नहर में पानी का प्रवाह रुकने से उन हिस्सों में काम करना आसान होता है, जहां सामान्य परिस्थितियों में तेज बहाव के कारण निर्माण और मरम्मत में कठिनाई आती है। इसी अवधि का उपयोग घाटों के निर्माण, समतलीकरण और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं को हो सकती है परेशानी हर की पौड़ी हरिद्वार के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। देशभर से श्रद्धालु यहां गंगा स्नान, पूजा और गंगा आरती के लिए पहुंचते हैं। गंगनहर बंद होने से हर की पौड़ी और आसपास के कुछ घाटों पर पानी का स्तर तथा प्रवाह प्रभावित हुआ है। इससे स्नान करने आने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ सकती है। हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से घाटों की वर्तमान स्थिति तथा स्नान की उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी अवश्य लें। 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद फिर शुरू होगा जलप्रवाह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ऊपरी गंगनहर में 7 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास पानी दोबारा छोड़ा जाना है। जलप्रवाह बहाल होने के बाद हर की पौड़ी सहित संबंधित घाटों पर पानी की स्थिति सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। इसलिए 8 नवंबर की सुबह तक जलप्रवाह सुचारु होने की उम्मीद को निर्धारित कार्यक्रम के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि हर घाट पर पानी की स्थिति की गारंटी के रूप में। अर्धकुंभ 2027 के लिए तैयार हो रहे घाट हरिद्वार में अर्धकुंभ मेले को देखते हुए घाटों के विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए स्नान घाटों, पहुंच मार्गों, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और भीड़ प्रबंधन का महत्व बढ़ जाता है। गंगनहर की बंदी निर्माण एजेंसियों को उन कार्यों को पूरा करने का अवसर दे रही है, जिन्हें पानी के निरंतर प्रवाह के दौरान करना कठिन होता है। निर्धारित समय में ये कार्य पूरे होने पर आगामी धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। गंगनहर बंदी का असर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर तक ऊपरी गंगनहर केवल हरिद्वार के घाटों से जुड़ी नहीं है। इसका पानी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में सिंचाई और दिल्ली-एनसीआर के कुछ क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। नहर बंद रहने के दौरान सिंचाई और जलापूर्ति की व्यवस्थाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। संबंधित विभागों को निर्धारित अवधि में रखरखाव कार्य पूरा करने के साथ-साथ जरूरी जलापूर्ति और उपलब्ध भंडारण का प्रबंधन भी करना होता है। श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह हरिद्वार की यात्रा से पहले हर की पौड़ी और आसपास के घाटों की मौजूदा स्थिति की जानकारी लें। यदि यात्रा का मुख्य उद्देश्य गंगा स्नान है, तो जलप्रवाह बहाल होने की निर्धारित तारीख को ध्यान में रखकर कार्यक्रम बनाएं। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का पालन करें। घाटों पर भीड़ और निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें। निष्कर्ष: हरिद्वार में ऊपरी गंगनहर की 18 दिन की बंदी अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों और वार्षिक रखरखाव का हिस्सा है। इस दौरान हर की पौड़ी सहित कुछ घाटों पर जलप्रवाह प्रभावित हुआ है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद पानी दोबारा छोड़े जाने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले ताजा स्थानीय जानकारी लेकर ही गंगा स्नान की योजना बनानी चाहिए। Visit for details about Har ki Pauri Heritage & Culture Har Ki PauriHaridwar Ardh Kumbh 2027Upper Ganga CanalUttarakhand Tourismअर्धकुंभ 2027उत्तराखंड पर्यटनकुंभ मेलाकुंभ मेला तैयारीगंगनहर बंदगंगा आरतीगंगा घाटगंगा स्नानहर की पौड़ीहरिद्वारहरिद्वार कुंभ