भारत में पर्यटन विकास की नई उड़ान: एक दशक में बदली तस्वीर, वैश्विक पर्यटन सूचकांक में 65वें से 39वें स्थान पर पहुंचा देश admin, October 14, 2026October 14, 2026 भारत में पर्यटन पिछले एक दशक में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण माध्यमों में उभरा है। देश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरें घरेलू तथा विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन सुविधाओं में निवेश और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस क्षेत्र के विकास को गति देने में भूमिका निभाई है। पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है। इससे होटल, रेस्तरां, परिवहन, टूर गाइड, हस्तशिल्प, होमस्टे और छोटे कारोबारों को भी रोजगार तथा आय के अवसर मिलते हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। वैश्विक पर्यटन सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार दिए गए समाचार ग्राफिक के अनुसार, भारत की रैंकिंग ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स (TTDI) में 2013 के 65वें स्थान से सुधरकर 2024 में 39वें स्थान पर पहुंच गई। यह सुधार पर्यटन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास की दिशा में प्रगति का संकेत है। हालांकि, किसी भी सूचकांक की रैंकिंग को समझते समय उसके मूल्यांकन के मानदंड, संस्करण और देशों के प्रदर्शन में हुए बदलावों को भी ध्यान में रखना चाहिए। भारत के पर्यटन क्षेत्र के सामने अभी भी पर्यटक सुविधाओं की गुणवत्ता, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन, प्रशिक्षित कर्मचारियों, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक सेवाओं को बेहतर बनाने जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। पर्यटन से अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा पर्यटन का प्रभाव होटल और एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहता। एक पर्यटक की यात्रा से स्थानीय टैक्सी चालक, रेस्तरां संचालक, गाइड, दुकानदार, हस्तशिल्प निर्माता और होमस्टे संचालक सहित कई लोगों को आय प्राप्त हो सकती है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में पर्यटन विकास का लाभ छोटे शहरों, गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और धार्मिक केंद्रों तक पहुंचाने की बड़ी संभावना है। इसके लिए स्थानीय परिवहन, डिजिटल बुकिंग, सुरक्षित यात्रा, स्वच्छ सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशिक्षित पर्यटन सेवाओं का विकास आवश्यक है। स्वदेश दर्शन योजना से पर्यटन स्थलों का विकास पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश में थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करना और विभिन्न पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं को बेहतर बनाना है। योजना के शुरुआती चरण में धार्मिक, सांस्कृतिक, विरासत, तटीय, वन्यजीव और अन्य पर्यटन सर्किटों से संबंधित परियोजनाओं को समर्थन दिया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाना, पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और गंतव्यों के विकास को अधिक व्यवस्थित बनाना था। वर्ष 2022 में स्वदेश दर्शन 2.0 की शुरुआत के साथ पर्यटन स्थलों को अधिक अनुभव-आधारित और टिकाऊ तरीके से विकसित करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि किसी स्थान की संस्कृति, प्राकृतिक वातावरण और स्थानीय पहचान के अनुरूप पर्यटन अनुभव तैयार करना भी है। उत्तराखंड की टिहरी झील के आसपास पर्यटन अनुभव विकसित करने और हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने जैसी परियोजनाएं इस दिशा के उदाहरण हैं। PRASHAD योजना से धार्मिक पर्यटन को मजबूती भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु मंदिरों, तीर्थस्थलों और धार्मिक आयोजनों में भाग लेने के लिए यात्रा करते हैं। इससे स्थानीय परिवहन, आवास, भोजन और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलता है। पर्यटन मंत्रालय की PRASHAD योजना का पूरा नाम Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive है। इस योजना के तहत चुने गए तीर्थस्थलों और आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विकास और सुधार को समर्थन दिया जाता है। योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं के लिए पहुंच, स्वच्छता, सुरक्षा, आवासीय सुविधाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है। सोमनाथ, श्रीशैलम और गोवर्धन जैसे धार्मिक गंतव्यों का उल्लेख धार्मिक पर्यटन के महत्व को दर्शाता है; हालांकि, किसी विशेष स्थल पर योजना के अंतर्गत हुए कार्यों की पुष्टि संबंधित परियोजना के आधिकारिक विवरण से की जानी चाहिए। सड़क, रेल और हवाई संपर्क से आसान हुई यात्रा पर्यटन के विकास में कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, हवाई अड्डों के विकास, क्षेत्रीय हवाई संपर्क और रेलवे के आधुनिकीकरण से अनेक गंतव्यों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हुआ है। वंदे भारत ट्रेनें और UDAN जैसी क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना भी परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। बेहतर संपर्क से कम समय में यात्रा करना संभव होता है और पर्यटन स्थलों तक अधिक लोगों की पहुंच बन सकती है। हालांकि, किसी पर्यटन स्थल की वास्तविक पहुंच केवल परिवहन नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती। अंतिम चरण का परिवहन, सड़क की स्थिति, स्थानीय संकेतक, पार्किंग और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। आध्यात्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था भारत के धार्मिक स्थलों का महत्व आस्था और संस्कृति से आगे बढ़कर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ा है। तीर्थयात्रियों की आवाजाही से होटल, धर्मशाला, भोजनालय, परिवहन सेवाओं, पूजा सामग्री और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आजीविका मिलती है। यदि धार्मिक पर्यटन का विकास उचित योजना के साथ किया जाए, तो इससे विरासत संरक्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। इसके लिए भीड़ प्रबंधन, कचरा निस्तारण, जल संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय परंपराओं के सम्मान को प्राथमिकता देना आवश्यक है। पूर्वोत्तर और ग्रामीण पर्यटन पर बढ़ता ध्यान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, ग्रामीण क्षेत्रों और अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। प्राकृतिक दृश्यों, स्थानीय खानपान, पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और सामुदायिक अनुभवों के माध्यम से इन क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर अधिक प्रमुखता मिल सकती है। ग्रामीण पर्यटन से स्थानीय परिवारों के लिए होमस्टे, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य उत्पादों के कारोबार के अवसर बन सकते हैं। लेकिन इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन की वहन क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। आगे की राह: टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन भारत के पर्यटन क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने से तय नहीं होगी। पर्यटन स्थलों की गुणवत्ता, स्थानीय लोगों की आय, विरासत का संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग भी महत्वपूर्ण होंगे। डिजिटल सेवाओं, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, प्रशिक्षित गाइडों, स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं में निवेश से भारत को वैश्विक पर्यटन बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद मिल सकती है। निष्कर्ष: पिछले दशक में भारत के पर्यटन क्षेत्र में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और पर्यटन योजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण विकास प्रयास हुए हैं। स्वदेश दर्शन, PRASHAD और क्षेत्रीय संपर्क जैसी पहलों की प्रभावशीलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि वे स्थानीय रोजगार, बेहतर पर्यटक अनुभव और सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में कितना योगदान देती हैं। MyDharm Tourism Development PRASHAD योजनाTravel and Tourism Development IndexTTDI 2024UDAN योजनाआध्यात्मिक पर्यटनग्रामीण पर्यटनधार्मिक पर्यटनपर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चरपर्यटन विकासपर्यटन समाचारभारत की विरासतभारत पर्यटनभारत पर्यटन सूचकांकवंदे भारत ट्रेनस्वदेश दर्शन 2.0स्वदेश दर्शन योजना