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पहाड़ों का ‘तेल अवीव’: हिमाचल के धर्मकोट गांव में बसता है ‘मिनी इजरायल’

admin, October 11, 2026October 11, 2026

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित धर्मकोट गांव अपनी अनोखी पहचान के कारण देश-विदेश के पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। मैकलोडगंज और धर्मशाला के आसपास पहाड़ियों में बसा यह छोटा-सा गांव ‘मिनी इजरायल’ और ‘पहाड़ों का तेल अवीव’ जैसे नामों से मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और अलग-अलग संस्कृतियों का मेल इसे हिमालय के खास पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।

क्यों कहा जाता है धर्मकोट को ‘मिनी इजरायल’?

धर्मकोट में लंबे समय से इजरायल से आने वाले पर्यटकों की अच्छी-खासी आवाजाही रही है। कई पर्यटक यहां कुछ दिनों के लिए आते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक ठहरते हैं। इसी वजह से गांव में इजरायली संस्कृति की झलक दिखाई देती है।

यहां कई कैफे और गेस्टहाउस में हिब्रू भाषा के साइनबोर्ड देखने को मिलते हैं। कुछ कैफे में इजरायली और मध्य-पूर्वी व्यंजन भी परोसे जाते हैं। फलाफल, हुमस, पीटा ब्रेड और शकशुका जैसे व्यंजन इस इलाके के खानपान को खास बनाते हैं।

ताजी चाला ब्रेड और इजरायली खानपान का आकर्षण

धर्मकोट के कैफे और बेकरी इसकी पहचान का अहम हिस्सा हैं। यहां पर्यटकों को पारंपरिक भारतीय भोजन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यंजन भी मिलते हैं। ताजी बेकरी ब्रेड, कॉफी और शांत माहौल में बैठकर पहाड़ों का नजारा देखने का अनुभव पर्यटकों को आकर्षित करता है।

गांव में अलग-अलग देशों से आए यात्रियों के कारण खानपान और जीवनशैली में विविधता दिखाई देती है। हालांकि, हर कैफे में एक जैसी सुविधाएं या व्यंजन उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है।

सेना की सेवा के बाद शांति की तलाश

धर्मकोट की लोकप्रियता के पीछे इसका शांत वातावरण भी एक बड़ी वजह है। पहाड़ों, देवदार के जंगलों और प्राकृतिक दृश्यों के बीच स्थित यह गांव उन यात्रियों को आकर्षित करता है, जो व्यस्त जीवन से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।

योग, ध्यान, मेडिटेशन, संगीत और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए भी यह इलाका पसंदीदा ठिकाना बन गया है। यहां का धीमा जीवन, कैफे संस्कृति और आसपास के पहाड़ी रास्ते लंबे समय तक ठहरने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

हर साल करीब 20 हजार इजरायली पर्यटकों का दावा

समाचार रिपोर्ट में धर्मकोट और आसपास के क्षेत्र में हर साल लगभग 20,000 इजरायली पर्यटकों के आने का अनुमान दिया गया है। यह आंकड़ा अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि पर्यटकों की संख्या मौसम, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और यात्रा के रुझानों के अनुसार बदल सकती है।

विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी से स्थानीय होमस्टे, कैफे, रेस्तरां और अन्य पर्यटन व्यवसायों को भी लाभ मिलता है। इस तरह धर्मकोट की पहचान केवल एक खूबसूरत पहाड़ी गांव की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक मेल-जोल के केंद्र की भी बन गई है।

धर्मकोट में क्या-क्या देख सकते हैं?

धर्मकोट आने वाले पर्यटक इन अनुभवों का आनंद ले सकते हैं:

  • हिमालयी प्राकृतिक दृश्य: पहाड़ियों, देवदार के जंगलों और घाटियों के खूबसूरत नजारे।
  • कैफे और स्थानीय खानपान: भारतीय भोजन के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों का अनुभव।
  • योग और ध्यान: शांत वातावरण में मेडिटेशन और वेलनेस गतिविधियां।
  • ट्रेकिंग: धर्मकोट के आसपास के पहाड़ी रास्तों और त्रिउंड ट्रेक की ओर जाने वाले मार्गों का अनुभव।
  • मैकलोडगंज और धर्मशाला भ्रमण: आसपास के पर्यटन स्थलों, तिब्बती संस्कृति और स्थानीय बाजारों को देखने का अवसर।

ट्रेकिंग पर जाने से पहले मौसम, रास्ते की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह अवश्य जांचें।

कैसे पहुंचें धर्मकोट?

धर्मकोट हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मैकलोडगंज के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए पहले धर्मशाला या मैकलोडगंज पहुंचा जा सकता है। वहां से सड़क मार्ग या पैदल रास्तों के जरिए धर्मकोट जाया जा सकता है।

निकटतम प्रमुख हवाई संपर्क गग्गल स्थित कांगड़ा हवाई अड्डा है। रेल से आने वाले यात्रियों के लिए पठानकोट और आसपास के रेल संपर्क उपयोगी हो सकते हैं। यात्रा से पहले परिवहन सेवाओं और सड़क की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेना उचित रहेगा।

पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का अनोखा संगम

धर्मकोट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हिमालयी प्राकृतिक वातावरण के बीच अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक साथ दिखाई देते हैं। इजरायली पर्यटकों की लंबे समय से मौजूदगी ने गांव के कैफे, खानपान और पर्यटन व्यवसायों को एक विशिष्ट पहचान दी है।

‘मिनी इजरायल’ नाम इसकी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है, लेकिन धर्मकोट हिमाचल की स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत का भी हिस्सा है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय परंपराओं, पर्यावरण और सभी पर्यटकों के लिए समान एवं सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना भी जरूरी है।

निष्कर्ष: हिमाचल प्रदेश का धर्मकोट गांव उन यात्रियों के लिए खास जगह है, जो पहाड़ों की खूबसूरती, शांत वातावरण, कैफे संस्कृति और विभिन्न देशों के लोगों से मिलने-जुलने का अनुभव चाहते हैं। यही अनोखा मेल इसे ‘पहाड़ों का तेल अवीव’ और ‘मिनी इजरायल’ जैसी पहचान दिलाता है।

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