कौन हैं जागृत Editor, May 20, 2017 चेतना से जीवन संपूर्ण सृष्टि में उपस्थित प्रत्येक कण-कण को सजीव अथवा निर्जीव गुणधर्म के आधार पर दो प्रमुख भागों में आसानी से विभाजित किया जा सकता हैं। सजीव, जो किसी भी तरह की चेतना से युक्त हो तथा नीर्जीव, जो पूर्णतया चेतना विहीन हो। चेतना, जो की हर तरह… Continue Reading
धर्म के प्रति जागरूकता Editor, May 20, 2017 धर्म की समझ यदि मात्र कुछ शब्दों में ही व्यवहारिक तौर पर धर्म को समझना हैं तो कहा जा सकता हैं कि — धर्म अर्थात वह धारणा जिससे सृष्टि के कण-कण का कल्याण सुनिश्चित हो। धर्म अर्थात, स्वयं से जुड़े कण-कण की सेवा। सेवा, परिजनों की, समाज की, धरती की,… Continue Reading
इतिहास से परिचित Editor, May 20, 2017 इतिहास का महत्व किसी भी देश की नीव उस देश के इतिहास ज्ञान पर खडी होती हैं। जहाँ भी लोगों को उनके इतिहास का ज्ञान होता हैं, वे अपने मातृभूमि से मजबुती से जुड़े रहते हैं। इतिहास का ज्ञान वृक्ष की जड़ों कि भाँती लोगों को उनकी धरा से बांधे… Continue Reading
समाज के प्रती सचेत Editor, May 20, 2017 समाज का महत्व मानव जीवन बगैर समाज के अधूरा हैं। हमारा समाज हमें हमारी सभ्यता व संस्कृती से परिचित करवाता हैं। हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने में समाज की अहम भूमिका होती हैं। समाजिक सद्भाव कि अनीवार्यता नैतिकता कि दिशा में प्रेरित करती हैं। हम अपने समाज से जुड़ते… Continue Reading
राजनीति के प्रती जागरूकता Editor, May 20, 2017 राजनीती का महत्व “I hate Politics” यह तीन शब्द किसी भी पढें-लिखे युवा के लिये बेहद आम से बन गये हैं। या तो वो खुद दुसरों से कहता फिरेगा या फिर उसे कोई-न-कोई कहता मिल ही जायेगा। ना तो हमारी शिक्षा हमें राजनीति का महत्व पुरी तरह सिखा पाती हैं… Continue Reading
विदेशी षडयंत्र Editor, May 20, 2017 आजाद भारत का सच आज कहने को तो भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं जिसमें लोकतंत्र स्थापित हैं – अर्थात जनता द्वारा, जनता के लिये चुना गया प्रशासन। लेकिन आज़ादी के पश्चात से आज तक जैसी व्यवस्था मिली हैं यह कहने को मजबूर करती हैं कि भारत पर अब तक भारतीयों… Continue Reading
संचार तंत्र और साजिश Editor, May 20, 2017 मिडिया की जिम्मेदारी लोकतंत्र में संचार तंत्र चौथा स्तंभ माना गया हैं। संचार तंत्र कि जिम्मेदारी होती हैं कि वे लोगों के सामने देश कि वास्तविक स्थिती को लाये व देश से जुड़े सभी मसलों पर लोगों को “देशहित” में जागृत करें। किंतु लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर आज… Continue Reading
सामाजिक संचार तंत्र की भूमिका Editor, May 20, 2017 सामाजिक परिवेश प्राचीन दौर से आधुनिक युग तक कइ रूपों में सामाजिक परिवेश बदलता चला गया। इस बदलते परिवेश में कुछ यदि हितकारी बदलाव हुए तो कइ अहितकारी-अनचाही परिस्थितीयों ने भी जन्म लीया। सामाजिक दृष्टि से जो सबसे बड़ा पतन हुवा वह लोगों से लोगों का दुर होना। कहीं लोग… Continue Reading