सामाजिक संचार तंत्र की भूमिका Editor, May 20, 2017 सामाजिक परिवेश प्राचीन दौर से आधुनिक युग तक कइ रूपों में सामाजिक परिवेश बदलता चला गया। इस बदलते परिवेश में कुछ यदि हितकारी बदलाव हुए तो कइ अहितकारी-अनचाही परिस्थितीयों ने भी जन्म लीया। सामाजिक दृष्टि से जो सबसे बड़ा पतन हुवा वह लोगों से लोगों का दुर होना। कहीं लोग… Continue Reading
मनोरंजन जगत पर सतर्कता Editor, May 20, 2017 आधुनिक मनोरंजन का सच जिस तरह युग और युगांतर बदलते गये, मानवीय जीवन में भी जीने के तौर तरीकों में भारी बदलाव आया। भारत का मूल सांस्कृतिक जिवन जहाँ “सादा जीवन, उच्च विचार” जैसे मंत्र कि और प्रेरित करता हैं वहीं चकाचौंध से भरे संस्कार रहित आधुनिक जीवन में वैचारिक… Continue Reading
राष्ट्र रक्षक Editor, May 20, 2017 जीवन के ऋण मनुष्य-जीवन जन्म से ही तीन प्रकार के ऋणों से बंध जाता हैं। पहला ऋण ममता का, दुसरा समाज का व तीसरा मातृभूमि का। यदि प्रत्येक मानवीय जीवन अपनी इन तीन तरह के ऋणों के प्रती कृतज्ञता में बीते तो आत्म संतुष्टि को प्राप्त कर सकता हैं। इन… Continue Reading